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वो ‘क्रूरता’ क्या है? जीस आधार पे मिला धवन को पत्नी आयशा से जिस आधार पर मिला तलाक, जानें- क्या कहता है कानून

वो ‘क्रूरता’ क्या है? जीस आधार पे मिला धवन को पत्नी आयशा से जिस आधार पर मिला तलाक, जानें- क्या कहता है कानून

फैमिली कोर्ट के जज हरीश कुमार ने धवन की ओर से पत्नी आयशा पर लगाए सभी आरोपों को भी मान लिया है, शिखर धवन और आयशा मुखर्जी अब पति-पत्नी नहीं रहे. दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने उनके तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने माना कि आयशा की वजह से धवन को ‘मानसिक यातना’ से गुजरना पड़ा.
कोर्ट ने कहा कि आयशा ने या तो इन आरोपों का विरोध नहीं किया या फिर अपना बचाव करने में नाकाम रहीं.
धवन से 10 साल बड़ी आयशा किक बॉक्सर हैं. साल 2012 में शिखर धवन ने आयशा से शादी की थी. सितंबर 2021 में आयशा ने धवन से अलग होने की जानकारी दी थी. आखिरकार इस साल मार्च में शिखर धवन ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक का केस दायर कर दिया.

धवन और आयशा के तलाक से ‘क्रूरता’ चर्चा में आ गई है. ऐसे में जानते हैं कि क्रूरता का मतलब क्या है? और कानून इस पर क्या कहता है?

क्या है क्रूरता?

– 1955 के हिंदू मैरिज एक्ट और 1954 के स्पेशल मैरिज एक्ट, दोनों में ही ‘क्रूरता’ का जिक्र है. हिंदू मैरिज एक्ट से हिंदू धर्म को मानने वालों की शादी और तलाक होता है. जबकि, स्पेशल मैरिज एक्ट दो अलग-अलग धर्मों को मानने वालों पर लागू होता है.

– हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 में ‘तलाक’ का प्रावधान किया गया है. इसमें तलाक के कुछ आधार दिए गए हैं. इन्हीं में से एक ‘क्रूरता’ को भी तलाक का आधार माना गया है.
हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13B में आपसी सहमति से तलाक का जिक्र है. हालांकि, इस धारा के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए तभी आवेदन किया जा सकता है जब शादी को कम से कम एक साल हो गए हैं.

– इसके अलावा, इस धारा में ये भी प्रावधान है कि फैमिली कोर्ट दोनों पक्षों को सुलह के लिए कम से कम 6 महीने का समय देता है और अगर फिर भी सुलह नहीं होती है तो तलाक हो जाता है.

– हालांकि, इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में साफ कर दिया था कि अगर पति-पत्नी के बीच रिश्ते इस कदर टूट चुके हैं कि ठीक होने की गुंजाइश न बची हो तो इस आधार पर वो तलाक की मंजूरी दे सकता है.

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